संत गंगा दास के साहित्य को मुक्त कंठ से सराहा

संत गंगा दास के साहित्य को मुक्त कंठ से सराहा

अनेक विद्वानों वह भाषा विदो के संत गंगादास दास को महान दार्शनिक व खड़ी बोली का महाकवि बताते हुए उनके साहित्य की सराहना की है | संत गंगा दास पर एसएसवी कॉलेज में आयोजित साहित्य यज्ञ में शाहदरा से आए मुख्य अतिथि डॉ जगन्नाथ शर्मा हंस ने कहा कि, जिस समय भारतेंदु हरिश्चंद्र जैसे विद्वान खड़ी बोली को हिंदी काव्य रचना के लिए अनुपयुक्त मान रहे थे ,उनसे बहुत पहले ही संत गंगा दास खड़ी बोली की अनेक कलापूर्ण और सुंदर काव्य रचनाएं प्रस्तुत कर चुके थे | संत गंगा दास के साहित्य का समाज सुधार के योगदान विषय पर उन्होंने कहा कि प्राचीन विद्वानों ने स्वीकार किया है कि संत गंगा दास से पहले खड़ी बोली पर रचित साहित्य में कृतिम खड़ी बोली का प्रयोग हुआ है| जिसमें वास्तविकता नहीं लगती लेकिन संत गंगा दास के साहित्य में उस क्षेत्र का समूचा वातावरण मुहावरे में संबंधित क्षेत्र की मिट्टी की सुगंध समाहित है |

हापुड़ के निकटवर्ती गांव रसूलपुर में संत को प्रकाश में लाने वाले डॉक्टर हंस ने कहा कि यदि खड़ी बोली के साहित्य का अध्ययन किया जाए. तो गंगा दास खड़ी बोली के भीष्म पितामह से गंगा दास का साहित्य तथा संस्कृति समाज में फैली बुराइयों को दूर करने के लिए पर्याप्त है विशिष्ट वक्त दिल्ली में पधारे साहित्य का स्कोर सरस्वती के विरुद्ध पुत्र की संज्ञा देते हुए उन्हें बताया उनके मुताबिक हिंदी के साहित्य में कालिदास के अतिरिक्त इन के मुकाबले का कोई और आचार्य संत कभी नहीं मिलता उन्होंने कहा कि वह कंठ से नहीं बल्कि दे से गाते थे | उनके मुख से गंगा त्रिवेणी निकलती थी जिसकी समाज को आवश्यकता है नगर शिक्षा अधिकारी विशेष जान ने कहा कि खड़ी बोली के आदि कवि गंगा दास का काव्य भावात्मक व कलात्मक दोनों माध्यमों से सशक्त है |वह निश्चित ही कबीर तुलसी के तुल्य कवि थे उनकी तरह ही उन्होंने समाज को नया रास्ता दिखाने की कोशिश की डॉ प्रीतम सिंह ने संत दास के ग्रंथों का उल्लेख करते हुए कहा कि वह सभी धर्मों गए थे तिलक सिंह के निदेशक राकेश अग्रवाल अनिल बाजपेई विजय गोयल ब्रह्मपाल सिंह ने संत के जीवन पर प्रकाश डाला कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे काव्य गंगा के संपादक डॉ स्वामी श्यामानंद सरस्वती ने संत गंगा दास की जीवनी और साहित्यिक संदेशों को जीवन में उतारने का आवन किया पत्रकार अवधेश श्रीवास्तव ने संत गंगा दास को लेकर उनके शोध ग्रंथ का उल्लेख किया कॉलेज के प्राचार्य डॉ आर के गुप्ता जी गुप्ता महेश कुमार ने अतिथियों का स्वागत किया कार्यक्रम का संचालन राकेश अग्रवाल ने किया |

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